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समलैंगिक संबंध: समलैंगिक संबंधों से बढ़ा एचआईवी का खतरा, जानें क्या है वजह?

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समलैंगिक संबंध अब अपराध भले ही न हो, लेकिन समलैंगिक संबंध बीमारी बांट रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आगरा में समलैंगिक संबंधों के चलते 47 लोगों एचआईवी संक्रमित हो गए हैं। जिनका इलाज एसएन मेडिकल कालेज के एआरटी सेंटर में चल रहा है। एसएन कालेज के एआरटी सेंटर में एचआईवी के पंजीकृत 8935 में से 4017 मरीज इलाज ले रहे हैं। अब इस बदलते माहौल में समलैंगिक संबंध बनाने से
भी एचआईवी मरीज बढ़ रहे हैं।

लगातार बढ़ रहे है मरीज-
मीडिया रिपोर्ट की माने तो गत दो सालों में 47 मरीज आए है, वहीं पिछले महीने ही 6 नए मरीज सामने आए हैं। जिनमें से अधिकांश की उम्र 20 से 40 साल बताई जा रही है। एआरटी सेंटर प्रभारी डाॅक्टर ने बताया कि समलैंगिक संबंधों से एचआईवी का खतरा अधिक रहता है।

90 फीसदी रहते है घर के बाहर-
समलैंगिक संबंध से होने वाले एचआईवी ग्रसित मरीजों में से 90 फीसदी घर से बाहर और अकेले रहते हैं। ये कामकाजी लोग होते हैं और इनकी सोच भी बिंदास रहती है। चिकित्सक मानते हैं कि नए मरीज बीमारी के प्रति जागरूक हैं, लेकिन ऐसे मरीजों की संख्या अधिक हो सकती है।

क्या है बीमारी की वजह-
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 370 केस में वजह पता नहीं है, 189 सेक्स वर्करों से, 189 संक्रमित मां से गर्भस्थ शिशु को, 166 असुरक्षित यौन संबंध बनाने से, 162 संक्रमित रक्त चढ़ाने से, 140 संक्रमित इंजेक्शन से, 61 संक्रमित इंजेक्शन से नशाखोरी वहीं अब 47 केस समलैंगिक संबंध बनाने से सामने आए है।

क्या है मरीजों का आंकड़ा-
पंजीकृत मरीज की बात करे तो वह 8935 है, वहीं 4017 मरीजों का इलाज चल रहा है, इनमें से 2106 पुरुष मरीज हैं जिनको एचआईवी है, तो 1584 महिला मरीज हैं जिनका एचआईवी का इलाज चल रहा है, इनके अलावा 186 बच्चे हैं जो एचआइवी से ग्रस्त है।