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रक्तदान है जीवनदान: डॉ संजय मिश्रा, थैलेसीमिया बीमारी व रक्तदान पर कार्यशाला आयोजित

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रक्तदान समाज का हर वर्ग कर सकता है, लेकिन रक्तदान के प्रति फैले भ्रम के कारण जैसे की रक्तदान करने से कमजोरी आ जाएगी, फिर उनका स्वास्थ्य खराब हो जाएगा आदि इस तरह से कई भ्रांतियां फैली हुई है, जिनसे रक्तदान से दूर-दूर तक का कोई वास्ता नहीं है, बल्कि रक्तदान करने से न केवल किसी पीडि़त को बीमारी से राहत मिलती है, बल्कि उसे जीवनदान भी मिलता है, उक्त बातें रविवार को रानीदुर्गावती चिकित्सालय लेडी एल्गिन व थैलेसीमिया मुक्त मध्यप्रदेश समिति के बैनर तले शहर के समस्त सामाजिक संगठनों के द्वारा थैलेसीमिया बीमारी व रक्तदान जागरूकता को लेकर एल्गिन अस्पताल में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञ डॉ संजय मिश्रा में कही।

डॉ मिश्रा ने आगे बताया कि, रक्तदाता की विभिन्न जांच भी हो जाती है, वहीं नियमित रक्तदान करने से हृदयघात व कैंसर सहित अन्य कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया की थैलेसीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है, इससे बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है की शादी से पहले युवक-युवती को थैलेसीमिया की जांच आवश्यक करवाना चाहिए, अगर थैलेसीमिया की जांच के दौरान रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो आने वाली संतान को भी यह बीमारी हो सकती है, इसलिए इस बीमारी से आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण बातों पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है।

कार्यशाला में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा थैलेसीमिया की बीमारी को लेकर बारीकी से जानकारी उपलब्ध करवाते हुए रक्तदान के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के सम्बंध पैथोलॉजी विभाग विशेषज्ञ डॉ संजय मिश्रा, थैलेसीमिया रोग विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र छाबड़ा व शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजीव जैन के द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई गई।

हर माह लगता है ब्लड:-


थैलेसीमिया रोग विशेषज्ञ डॉ रविन्द्र छाबड़ा ने थैलेसीमिया बीमारी के संबंध में बारीकी से जानकारी देते हुए इसके लक्षण सहित इससे होने वाले नुकसान व परिवार की पीड़ा को बताया, इस बीमारी से बचने के लिए समाज के हर वर्ग को जागरूक रहने की नसीहत दी और कहा की थैलेसीमिया की बीमारी एक ऐसी बीमारी है, जिसके कारण हर माह इस बीमारी से पीडि़त को दो से तीन यूनिट ब्लड लगता है और समय पर ब्लड नहीं मिलता है व दवाईयां भी नहीं ली जाती है तो इससे शरीर में आयरन बढ़ जाने से कई पीडि़त की उम्र कम हो जाती है, जिससे कई उनकी कम उम्र में ही मृत्यु हो जाती है।

कार्यशाला के दौरान सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं व थैलेसीमिया मुक्त मप्र समिति के सदस्यों के द्वारा जिला चिकित्सालय विक्टोरिया में थैलेसीमिया वार्ड अलग से बनाए जाने सहित डे-केयर सेन्टर में विशेषज्ञ चिकित्सक नियुक्त करने सहित अन्य की मांग की गई। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।