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राजपथ पर दिखा भारत के शौर्य व संस्कृति का संगम, फ्लाईपास्ट करते बनाया त्रिशूल

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भारत आज अपना 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस खास राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सभी देशवासियों को बधाई दी। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए हैं। गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में पूरे देश ने आज भारत की विराट सैन्य शक्ति, ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर और अनेकता में एकता की गौरवशाली परंपरा को आज राजपथ से गणतंत्र दिवस की परेड में देखा। सभी को राजपथ से भारत के शौर्य व संस्कृति का अनूठा सगंम देखने को मिला। जिसमें पहली बार आजाद हिन्द फौज (आईएनए) के भूतपूर्व सैनिकों ने भी हिस्सा लिया।

भारत के 70वें गणतंत्र दिवस का मुख्य समारोह राजधानी के राजपथ पर हुआ। जिसमे दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सीरिल रामाफोसा समारोह के मुख्य अतिथि थे और प्रवासी भारतीय दिवस में हिस्सा लेने आये भारतवंशी नेताओं को भी इसके लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था।   

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद राष्ट्रपति ने सलामी मंच पर राष्ट्रीय ध्वाजारोहण किया जिसके बाद उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई और सेना के एम आई-17 हेलिकॉप्टरों ने राजपथ पर पुष्प वर्षा की।

इसके बाद राष्ट्रपति ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए सेना के लांस नायक नजीर अहमद वानी की पत्नी महजबीं को शांतिकाल का सर्वोच्च सम्मान अशोक चक्र प्रदान किया। इस दौरान राजपथ पर माहौल भावुक हो गया।

फ्लाईपास्ट करते वायु सेना के विमान, आसमान में बनाया त्रिशूल जिसने सभी का मन मोह लिया। यह नज़ारा देखने लायक था।

सूबेदार मेजर रमेश के नेतृत्व में 9 मोटरसाइकिल पर 33 लोगों ने बनाया पिरामिड

कैप्टन देवांश भूटानी के नेतृत्व में के-9 वज्र टैंक का दस्ता सलामी देता हुआ

समारोह में दिखी नारी शक्ति की ताकत



राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में इस साल की झांकी में नारी शक्ति की झलक दिखाई दी। नारी शक्ति में लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी ने आज राजपथ पर इतिहास रच दिया। उन्होंने भारतीय सेना की सर्विस कॉर्प्स का नेतृत्व किया। दिलचस्प बात यह है कि इस मार्चिंग कंटिनजेंट में उनके अलावा कोई महिला जवान शामिल नहीं थी। वह भारत के इतिहास में ऐसा करने वाली पहली महिला बन गई हैं। तो वही मेजर खुशबू कंवर ने आज आसाम राइफल्स के कंटिनजेंट का नेतृत्व किया। पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होकर देश की सबसे पुरानी पैरामिलिट्री फोर्स आसाम राइफल्स ने इतिहास रच दिया। बता दे कि मेजर खुशबू एक बच्चे की मां हैं।

रॉर्प्स ऑफ सिगनल्स की कैप्टन शिखा सुरभी ने अपनी टीम के साथियों के साथ गणतंत्र दिवस के मौके पर बाइक पर स्टंट दिखाए। वे परेड के डेयरडेविल सेगमेंट में हिस्सा लेने वाली पहली महिला है। तो वही लेफ्टिनेंट अंबिका सुधाकरन ने भारतीय नौसेना के कंटिनजेंट का नेतृत्व किया। इस दस्ते में 144 युवा नाविक मौजूद थे।