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जबलपुर: बच्चों के भविष्य को निखारने “हम हैं न” फाउण्डेशन की अनूठी पहल

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जबलपुरमदन महल पहाड़ी से रोजाना हटाए जा रहे नागरिकों को प्रशासन द्वारा तिलहरी विस्थापन स्थल में विस्थापित किया जा रहा है। यह पर वर्तमान में सैकड़ों की संख्या में नागरिक तिरपाल व खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। जिनका रोजी-रोजगार सबकुछ छिन गया है, यहां तक की यहां के बच्चों की सिर पर परीक्षा है और वह शिक्षण कार्य से भी वंचित हो रहे हैं। उन सभी बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो न जाए, इसके लिए युवाओं व युवतियों द्वारा हम हैं न फाउण्डेशन के बैनर तले उन्हें रोजाना कुछ घंटे नि:शुल्क शिक्षा देने का कार्य प्रारंभ किया गया है, ताकि यह स्कूली बच्चे शिक्षण कार्य से वंचित न हो सके

शहर की यह सामाजिक संस्था जो कि निरन्तर पीड़ित मानवता की सेवा आगे रहती है ने बच्चो के भविष्य को बचाने व निखारने लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की है। हम हैं न फाउण्डेशन की ऋचा चौकसे, दिशा यादव, राहुल पिल्ले, श्रृति चौकसे, सुशील यादव, प्रशांत साहू, सचिन लोधी ने बताया की उनके द्वारा विस्थापन स्थल बने घरों का सर्वे किया गया था। सर्वे के दौरान उन्होंने देखा की यहां पर रहने वाले नागरिकों के बच्चे पढऩे वाले हैं, जिनको विस्थापन स्थल तिलहरी में आ जाने के कारण वह अब स्कूल भी नहीं जा पा रहे हैं और उनकी कुछ दिनों बाद से परीक्षा भी है, वहीं 10वीं व 12वीं कक्षा में अध्ययन करने वाले छात्र व छात्राएं भी हैं। जिनका शिक्षण कार्य भी प्रभावित हो रहा है। इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया है की जब तक उनकी परीक्षा पूरी नहीं हो जाती है, तब-तक वह विस्थापन स्थल तिलहरी में रोजाना जाकर करीब दो से तीन घंटे नि:शुल्क शिक्षा देंगे, ताकि बच्चे कम से कम अपनी परीक्षा की तैयार कर सकें और जब तक वह स्कूल नहीं जा रहे हैं, तब तक उनका अध्ययन कार्य भी जारी रहे।

ललपुर बस्ती में भी दी जाती है शिक्षा


हम हैं न फाउण्डेशन के सदस्यों ने बताया की उनके द्वारा विगत कई वर्षो से ललपुर बस्ती में रहने वाले बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है, इसके अलावा फाउण्डेशन के द्वारा रक्तदान, पर्यावरण, थैलेसीमिया, जरूरत मंदों को समय-समय पर जरूरतों की सामग्री प्रदान करने सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं। इसी के तहत उनके द्वारा विस्थापन स्थल तिलहरी में भी सैकड़ों बच्चों को नि:शुल्क दी जा रही है, ताकि यह बच्चे इस मुसीबत व परेशानी में अपने शिक्षण कार्य से वंचित न हो सके और उनकी पढ़ाई जारी रहे।