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विशेष: जाने क्यों होता है महिलाओं में यूट्रीन प्रोलैप्स व इससे बचाव के उपाय: आयुषी गोस्वामी

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यूट्रीन प्रोलैप्स यानी (गर्भाशय का खिसकना) महिलाओं में बच्चादानी अपनी जगह से खिसकने की अवस्था को यूट्रीन प्रोलैप्स या डिस्प्लेसमेंट ऑफ़ ओवरी कहा जाता है। परेशानी की गंभीरता को देखकर डॉक्टर दवाइयों से इलाज करते हैं या फिर गर्भाशय को सर्जरी द्वारा निकालने की नौबत भी आ सकती है। यहाँ ध्यान दें कि सर्जरी होने के बाद भी एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है। इसे बीमारी नहीं कहा जा सकता परन्तु यह स्थिति गंभीर बीमारियों का कारण अवश्य बन सकती है। आपको बता दे कि तक़रीबन 14-40% स्त्रियों का किसी हद तक यूट्रीन प्रोलैप्स होता है।

यूट्रीन प्रोलेप्स के लक्षण-

  1. पेट और पीठ के निचले हिस्से में या योनि में किसी तरह का भार महसूस होना।
  2. योनिद्वार के बाहर कोई संरचना नज़र आना।
  3. मल-मूत्र त्यागने में कठिनाई आना।
  4. पेट दर्द, कमर दर्द, सर दर्द, कब्ज़ या बार-बार पेशाब आना।
  5. चलने-फिरने, भारी सामान उठाने में परेशानी होना।
  6. योनि से रक्तस्त्राव होना एवं संक्रमण होना।

यूट्रीन प्रोलैप्स होने के कारण –

  1. बार -बार गर्भ धारण करने से।
  2. बढ़ती उम्र के कारण मांसपेशियों के कमज़ोर पड़ जाने से।
  3. मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति ) के बाद एस्ट्रोजन हॉर्मोन की कमी होने से।
  4. अधिक व लगातार वज़न उठाने से।
  5. लम्बे समय तक खांसी या मोटापा मांसपेशियों को कमज़ोर करता है।
  6. गर्भाशय के पास किसी तरह की चोट लगने से।
  7. कब्ज़ या बवासीर भी एक कारण हो सकता है।

यूट्रीन प्रोलैप्स से बचाव के उपाय –

  1. किगल एक्सरसाइज एक ऐसा व्यायाम है जो श्रोणि या पेल्विक मसल्स (जो गर्भाशय, छोटी आंत, योनि आदि को सहारा देती है) को मज़बूत बनाता है।
  2. बार-बार प्रेगनेंसी व गर्भपात से बचें।
  3. वज़न बढ़ने या ज़्यादा भार उठाने से बचें।
  4. कब्ज़ ना होने दें।
  5. फाइबर युक्त भोजन जैसे फल, दाल, मक्का, सब्ज़ियां आदि चीज़ें खाएं।
  6. मेनोपॉज के बाद डॉक्टर से संपर्क में रहें, नियमित रूप से व्यायाम करें।

आयुषी गोस्वामी