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छत मिल जाये साहब, रोटी हम खुद कमा के खा लेंगे, तिलहरी में विस्थापित किये सभी परिवारो के हालात खराब

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जबलपुर। हमारा जीवन ऐसा हो गया है कि क्या बताए, रहने को घर के नाम पर एक बड़ा सा सूनसान मैदान है, जहाँ हमे तिरपाल व पन्नी के टेंटो में रहकर गुजारा करना पड़ रहा है। पहले से तो गरीब थे ही, अब बेघर भी हो गए है। छोटे-छोटे बच्चे है खाना-पीना सब दुस्वार हो चुका है कमाने का कुछ साधन नही है, नही चाहिए कुछ बस एक छत मिल जाये साहब, रोटी हम खुद कमा के खा लेंगे। यह कहते हुए उस बुजुर्ग माता की आंखों में आँसू आ गए, मानो जैसे आसमान से बरसात आ गई हो। ऐसे और भी न जाने कितने लोग है जो कि ऐसे रहने को मजबूर है। तिलहरी में विस्थापित किये गए 2 से 3 हजार परिवारो के हालात खराब है।

दरअसल प्रशासन द्वारा पिछले महीने मदन महल की पहाड़ी से हटाये गए करीब 2 से 3 हजार गरीब परिवार को तिलहरी विस्थापन स्थल में विस्थापित किया गया है। वर्तमान में सैकड़ों की संख्या में वहाँ नागरिक तिरपाल, पन्नी के सहारे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। जिनका रोजी-रोजगार सबकुछ छिन गया है, यहां तक की उनके बच्चों की शिक्षा भी छूट गई है।

1 माह से ज्यादा समय पूरा अब रहना मुश्किल हो रहा –

पहाड़ी से विस्थापित किये गए सभी ग़रीब परिवारों का कहना है कि, 1 महीने से ज्यादा का समय हो चुका है हमे यहाँ पर हमारे पास रोजगार नही है। हमे प्रशासन व सरकार द्वारा स्थायी नही किया जा रहा है। आखिर क्यों हमारी तरफ कोई देख नही रहा है, हमारा यहाँ रहना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि ठंड हो या गर्मी हमे पन्नियों के अंदर रहना पड़ रहा है , बीते दिन हुई बारिश में तेज़ हवाओ के चलते हमारी टेंटो की पन्नियाँ उड़ गई, तिरपाल फट गई। यहां खुले मैदान में कीचड़, बदबू, गन्दगी के बीच रहना पड़ रहा है घरों में रखी वस्तुएं खराब हो रही है। बीमारियां हो रही है। खाना-पीना दुस्वार है।

न लाइट है न ही कोई सुरक्षा है:-

स्थानीय लोगो ने बताया कि, हम ऐसी जगह रह रहे है जहाँ सिर्फ एक सूनसान मैदान है, हमारे टेंटो में लाइट नही है कई टेंटो में तो दो परिवार एक साथ गुजारा कर रहे है, रात के समय यहाँ कीड़े-मकौड़े व ख़तरनाक जानवरो का डर होता है, आवागमन के कोई साधन नही है, बच्चे है बेटियां है लेकिन कोई सुरक्षा नही है। लोगों ने बताया बीच मे कई हादसे भी हुए रात के समय। जानवरों की आवाज़ें आती है तो डर बना होता है।

अधिकारी बात टाल देते है

लोगो ने बताया कि यहाँ समुदाय भवन है जिनमे कई कमरे खाली है पर यहाँ रहने की अनुमति नही दी जा रही है। लोगो ने अधिकारियों से सम्पर्क किया पर अधिकारी बात को टाल देते है। हम कहाँ जाए बस मुसीबतों को झेल रहे है।

कलेक्टर ने कहा था रोज आएंगी अब हम ही गए

तिलहरी में रह रहे लोगो ने बताया कि, कलेक्टर छवि भारद्वाज मेडम ने कहा था कि वे यहाँ रोज़ आएंगी और परेशानी का जायजा लेंगी। लेकिन ऐसा कहकर वे दुबारा यहाँ नही आई। इसीलिए हम उनसे मिलने गए थे परन्तु अधिकारियों की बैठक के चलते उनसे मिलना नही हो पाया बस इंतज़ार करने को कहा गया। दअरसल सोमवार को दोपहर विस्थापित परिवारों की आधा सैकड़ा महिलाएं शिकायत पत्र लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुँची थी, उनका कहना था कि हमने गलत किया अतिक्रमण करके लेकिन क्या शहर से सारे अतिक्रमण हट गए।

इनका कहना है –

छात्र अरुण पटेल का कहना है कि सरकार ने लोगो को तिलहरी विस्थापित किया लेकिन वहाँ पर प्रगति कार्य बहुत धीमा चल रहा है जब से बारिश हुई है तब से और सारी व्यवस्था ठप्प हो गई हैं। कलेक्टर मेडम और हमारी सरकार को जल्द ही इन ग़रीब परिवार के लिए कुछ हल निकलना चाहिए।
समाज सेवी अनिल रैकवार का कहना है कि जो विस्थापित नागरिक है उनके लिए सबसे बडी दिक्कत वर्तमान में अपने व्यवसाय को ठीक करने की है, रोजगार दिलाने की है क्योंकि उनको अपने कार्य करने में परेशानी हो रही है उनके पास काम नही है अधिकतर वहाँ मजदूर वर्ग के लोग है जो दैनिक मजदूरी करके ही अपना पालन पोषण करते थे जो कि अब बेरोजगार हो गए है।
कपिल ठाडानी का कहना है कि, विस्थापित किये गए परिवारों में ऐसे बच्चे है जिनकी शिक्षा नही हो पा रही है। जो स्कूल व कॉलेज में है उनको शिक्षा की व्यवस्था साथ ही खाने-पीने की चीजे भी ज्यादा नही मिल रही है। इसके लिए सरकार और सभी सामाजिक संस्थाओं को मिलकर कुछ प्रयास करना चाहिए।
समाज सेवी जितेन्द्र श्रीपाल का कहना है कि जो तिलहरी में बच्चों को शिफ्ट किया गया है उन बच्चों को पढ़ाई में प्रॉब्लम हो रही है स्कूल भी बच्चों का इतनी दूर है की 10 से 12 किलोमीटर उन्हें सिटी आना पड़ता है सरकार को तिलहरी गांव में बच्चों के लिए एक निःशुल्क स्कूल लाने ले जाने के लिए बस या वेन की व्यवस्था करना चाहिए।