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JabalpurView: शहर पहुँचे जाने-माने कॉमेडियन रवि गुप्ता व हिमांशु आर्या, खास बातचीत में शेयर किये अपने एक्सपीरियंस

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हर कलाकार का अपना एक अलग नज़रिया होता है, जिससे वह आगे काम करता है, एक कलाकार के निरर्थक जीवन को सार्थक बनाती है उसकी कला। इसीलिए मेहनत हमेशा करते रहे। 4 साल मैने जॉब की लेकिन अंदर से एक फाइट चलती रही कि नही जीवन में कुछ अलग करना है, मैं किसी और चीज़ के लिए बना हूं, फरफॉम करना था बस फिर क्या कॉमेडी देखी, अपनी कला को पहचाना और आ गया स्टैंड अप कॉमेडी की दुनिया मैं… यह कहना “शुद्ध देशी कॉमिक्स” के नाम से मशहूर स्टैण्डअप कॉमेडियन ‘रवि गुप्ता’ का। कॉमेडियन रवि गुप्ता रविवार को जबलपुर कॉमेडी क्लब के कार्यक्रम में शहर पहुँचे जहाँ उन्होंने “fourthpiller” से खास बातचीत की व अपने करियर से जुड़े कुछ अहम किस्से भी शेयर किए। आइये आपको रूबरू कराते है हमारे सवालो व रवि गुप्ता के जवाबो से :-

कार्टूनिस्ट से कॉमेडियन तक का सफर कैसा रहा –

मेरी जर्नी शुरू हुई जब में जॉब कर रहा था। 4 साल जॉब की लेकिन शुरू से कुछ अलग करने की चाह थी। फरफॉम करना था हमेशा से तो धीरे-धीरे जॉब के साथ ही कॉमेडी चालू की। पहले में कार्टूनिस्ट के तौर पर भी काम किया। फिर लिखना चालू किया, ओपन माईक किये करता रहा, हार नही मानी कभी और आज यहाँ हूँ। यही मेरी जर्नी है।

पहला परफेक्ट 5 मिनट कैसे मिला –

जब ओपन माइक शुरू होता है तो आपको 5 मिनट ही मिलते है खुद को साबित करना होता है मेरा 5 मिनट तो ऐसा था जब स्टेज गया तो एक स्माइल थी, खुद को साबित करना था। फिर एक दिन मेरा भी आया जब खुद को साबित किया।

8 मिनट के साथ गए लेकिन 3 मिनट में रुक गए –

सबको लगता है ओपन माइक आसान होता है पर रियालटी में ऐसा नही है मेरा भी वही था। 8 मिनट लेकर गया मगर 3 मिनट में रुक गया। इतने सारे जनसमूह के सामने नही होता एक मनोवैज्ञानिक दबाव होता है। मेरे साथ भी वही हुआ चीजें पता नही होती आपको।

न्यू कॉमिक आर्टिस्ट कैसे स्टार्ट करे –

एक बिगनर न्यू आर्टिस्ट के लिए ओपन माइक सब कुछ होता है, कला ही सब कुछ होती है, कला की विधा सिखाई नही जाती है ये तो अंदर से निकलती है हमे बस एक्सप्लोर करना होता है, बस यही कहूँगा क्यों करना है कॉमेडी वो पता होना चाहिए। आसान नही है तब ही करे जब आपका दिल करे , पैशन ज़रूरी है, अगर कला है तो पैशन भी है न्यू आर्टिस्ट मेहनत करे, डरे नही और पेसेन्स रखे साथ ही मौके को न छोड़ें जब भी मौका मिले भले 4 लोग हो उनके सामने फरफॉम करे।

लोगो को हँसाना कितना कठिन है –

लोगो को हँसाना काफी कठिन है, शुरुआत में काफी देर लगी लेकिन फिर लोगो की नब्ज पकड़ी, लोगों को समझा, फिर धीरे-धीरे सफलता मिली।

एब्यूज कंटेंट ज़रूरी है क्या कॉमेडी में –

मैं इसे दो तरीको से देखता हूं, अगर ज़रूरत है उस टाइम पर तो हा ज़रूरी है, लेकिन पब्लिक अटेन्शन के लिए गलत है। म समझता हूं एडुकेशन इसमें बहुत मायने रखता है। कई फिल्में बनी है आप देख सकते है

आपकी इंसप्रेशन कौन रहा है –

मेरी इंसप्रेशन वैसे तो में खुद हूँ लेकिन है जाकिर खान, कपिल शर्मा, राजू श्रीवास्तव पसन्द है। इनसे मैं इन्सपायर हुआ हूं।

आगे क्या प्लान्स है –

अपना दयारा बढ़ाना चाहता हूँ। आगे भी मेहनत करके लोगो का दिल जीतना है। छोटे शहरो से आम लोगो से जुड़ा रहूँगा।

जबलपुर आकर कैसा लग रहा है –

जबलपुर आकर अच्छा लग रहा है पहली बार आया हूं लोगो ने काफी बार मेसेज किये मुझे अब आने का मौका मिला। छोटे शहर से मैं भी हूँ तो पसन्द है छोटे शहर से जुड़ना मुझे।

संदेश क्या देना चाहते है

बोर्ड एग्जाम में अगर आप फैल तो होते है डरे नही । निराशा सफलता की सीढ़ी होती है। मौक़े मिलेंगे मेहनत निरन्तर करे। क्योंकि अपना टाइम आता है।

तो ये थे रवि गुप्ता जिन्होंने हमारे साथ अपने खास एक्सपीरियंस शेयर किए। ” अब बात उनकी जिन्होंने जबलपुर से अपना कोमेडी सफर शुरु किया। संस्कारधानी में कॉमेडी को समझा व यहाँ कॉमेडी को लाये। हम बात कर रहे हमारे ही अपने ‘मुह मिया मिट्ठू’ नाम से मशहूर हिमांशु आर्या की ” । हिमांशु भी हमारे साथ बातचीत में शामिल रहे आइये आपको बताते है हिमांशु से ख़ास बातचीत के कुछ अंश:-

आपने जबलपुर में शुरुआत कैसे की –

मेरी शुरुआत ऐसी रही कि कॉमेडी करना पैशन थी, तो दिल्ली जाता था वहाँ जाकर ओपन माइक को पहले समझा। फिर जबलपुर में इसकी शुरुआत की। नए लोगो से जुड़ा फिर उनके साथ मिलकर शहर में इसकी शुरूआत हुई।

लोगो का रेस्पॉन्स कैसा रहा –

शुरुआत में लोगो का रेस्पॉन्स कम था। धीरे-धीरे यहाँ पर लोगो को समझ आया कि ओपन माइक होता क्या है। मेहनत की लोगो का प्यार मिला। 

छोटे शहर से बड़े शहर जाना कैसा अनुभव रहा –

काफी अच्छा अनुभव रहा, ये भी मेरी स्ट्रगलिंग का एक पार्ट रहा है लोगो आपको जज करते है लेकिन इसी से आपकी अलग पहचान बनती है।

जबलपुर कॉमेडी क्लब चालू करने का उद्देश्य-

जबलपुर में कॉमेडी क्लब स्टार्ट करने का उद्देश्य जैसे नाम से पता चलता है। यहाँ के टलैण्ट को दिखाना था, निखारना था। लोग जबलपुर का नाम जाने इसी उद्देश्य के साथ यह स्टार्ट किया। आज बेहद खुशी होती है जब सफलता को देखता हूँ तो।

आपकी प्रेरणा कौन रहे है –

मेरी प्रेरणा 2005 में आया लॉफ्टर चेलेंज शो था। वही देखकर मैने अपने अंदर को कला को पहचाना। अभी के समय मे मुझे वरुण ग्रोवर पसन्द है।

फ्यूचर प्लान आपका क्या है –

मेरा फ्यूचर प्लान जबलपुर के टैलेन्ट को और बढ़ाना है, रवि के साथ आगे भी ओपन माइक जैसे शो आयोजित करेंगे। प्रयास रहेगा कुछ नया करने का ताकि लोगो का प्यार बना रहे।

एक संदेश नए आर्टिस्ट के लिए-

मेहनत करे, डरे नही। अपने आप पर विश्वास रखे तभी आप आगे बढ़ पायेंगे। खुश रहे हमेशा चीजों का सॉल्यूशन मिलता है।

रिपोर्ट- साकेत सिंह