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अंतरिक्ष मे इसरो की बड़ी कामयाबी, दुश्मन के राडार का पता लगाने किया पीएसएलवी-सी45 का सफल प्रक्षेपण

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सोमवार की सुबह भारत ने एक और इतिहास रचकर अंतरिक्ष मे बड़ी कामयाबी हासिल की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सुबह 9 बजकर 27 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा सतीश भवन सेंटर स्पेस से पीएसएलवी-सी45 का सफल प्रक्षेपण किया। स्वदेशी सर्विलांस सैटेलाइट एमसैट के साथ 28 विदेशी नैनो सैटेलाइट को अंतरिक्ष भेजा गया। यह पीएसएलवी की 47वीं उड़ान है। नासा की तरह आम आदमी को रॉकेट लांचिंग दिखाने के लिए करीब 5 हजार दर्शक क्षमता वाली स्टेडियम जैसी गैलरी सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में तैयार कराई गई थी।

बता दे कि , एमिसैट उपग्रह का मकसद विद्युतचुंबकीय माप लेना है। इस मिशन के जरिए अंतरिक्ष एजेंसी के हिस्से में कई पहली चीजों का श्रेय आएगा जहां वह विभिन्न कक्षाओं में उपग्रह स्थापित करेगी और समुद्री उपग्रह अनुप्रयोगों समेत कई अन्य पर कक्षीय प्रयोग करेगी।

दुश्मनों पर रखेगा नज़र:-

एमिसैट सुरक्षा के नजरिए से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे इसरो और डीआरडीओ ने मिलकर बनाया है। इसका खास मकसद पाकिस्तान की सीमा पर इलेक्ट्रॉनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नजर रखना है। EMISAT सैटेलाइट का इस्तेमाल दुश्मन के राडार का पता लगाने और कम्युनिकेशंस इंटैलीजैंस और तस्वीरों को इकट्ठा करने के लिए किया जाएगा। इलैक्ट्रॉनिक सैटेलाइट सुरक्षा एजैंसियों को यह जानने में मदद करते हैं कि उस क्षेत्र में कितने सैलफोन सक्रिय हैं।

जाने क्या है EMISAT :-

  • समुद्री उपग्रह प्रयोगों के लिए इसरो से स्वचालित पहचान प्रणाली हैं जो जहाजों से प्रेषित संदेशों को कैप्चर करते हैं।
  • एमसैट (रेडियो एमेच्योर सैटेलाइट कॉर्पोरेशन), भारत से ऑटोमैटिक पैकेट रिपीटिंग सिस्टम, पोजीशन डाटा की निगरानी और शौकिया रेडियो ऑपरेटरों की सहायता के लिए।
  • अंतरिक्ष में विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम की जांच करेगा ये सेटेलाइट
  • 436 किलोग्राम वजन वाले इस सैटेलाइट से भारतीय सर्विलांस होगा मजबूत
  • डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने स्वदेश में ही किया है इस सैटेलाइट का निर्माण
  • 749 किमी ऊंची कक्षा में स्थापित होने के बाद करेगा रडार नेटवर्क की निगरानी