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शहर में बनी फ़िल्म ‘चौसर फिरंगी’ के डायरेक्टर व कलाकारों से विशेष बातचीत, बोले जबलपुर का अपना सिनेमा बनाना है मुख्य उद्देश्य

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हर जगह का अपना एक अलग सिनेमा होता है, जो उस शहर की पहचान बनाता है। आप देखिए कि बंगाल, महाराष्ट्र व दक्षिण भारत का खुद का एक अलग सिनेमा है उनकी अपनी बोली है जो उनका सिनेमा दर्शाती है। ठीक उसी प्रकार हम भी चाहते है कि, जबलपुर मध्यप्रदेश का खुद का एक सिनेमा हो, जबलपुर सिनेमा के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाये और हमारे शहर में ऐसी प्रतिभाएं है जो अलग तरह से काम करने में सक्षम है बस इसी उद्देश्य के साथ हमने यह फ़िल्म बनाई है….,, यह कहना है शहर में ही गयात्री मोशन पिक्चर के बैनर तले बनाई गई फ़िल्म “चौसर फिरंगी” के डायरेक्टर संदीप पांडे का।

दरअसल संस्कारधानी की गलियों व आस-पास की जगहों को फोकस करके बनाई गई मध्यप्रदेश जबलपुर की पहली फ़िल्म “चौसर फिरंगी” के डायरेक्टर संदीप पांडे व फ़िल्म के सारे ही कलाकार “FourthPiller” से विशेष बातचीत में मुखातिब हुए एवं फ़िल्म व अपने करियर से जुड़े कुछ अहम किस्से भी हमसे शेयर किए। आइये जानते है फ़िल्म से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें :-

लोगो को पसन्द आ रही है फ़िल्म ख़ुशी है –

फ़िल्म के डायरेक्टर संदीप पांडे ने बताया कि, फ़िल्म चौसर फिरंगी 5 अप्रैल को प्रदेश में रिलीज हो चुकी है, और लोगो को पसन्द भी आ रही है रिस्पॉन्स काफी अच्छा है तो खुशी है। लोगो कहना है कि कुछ हटकर है फ़िल्म एवम अलग करने का प्रयास किया है। ऑडिएंस ही हमे बनाती है तो अगर ऑडियंस का रिस्पांस मिलता तो जाहिर सी बात है खुशी होती हैं। स्थल के अलावा भी शहर है जो आत्मा होता है।

दर्शनीय स्थल ही नही बल्कि शहर की गलियां भी है जो आत्मा है –

संदीप पांडे ने बताया कि, जब भी हमारे जबलपुर में लोकल सिनेमा की बात आती है या जबलपुर पर्दे में आता है तो हमेशा भेड़ाघाट, ग्वारीघाट या दर्शनीय स्थल को ही दिखाया गया है। लेकिन सिर्फ दर्शनीय स्थल ही नही है, बल्कि शहर की गलियां व आसपास की जगह जहाँ आप अमूमन रहते है वह आत्मा होती है, हमने उसी को ध्यान में रखकर यह फ़िल्म बनाई है। उन्होंने बताया कि हमने उन्ही गलियों-मोहल्लो व रोजमर्रा की ज़िंदगी को इस फ़िल्म में दर्शया है।

शुरुआत करने के लिए कठिनाई से गुजरना पड़ता है –

डायरेक्टर संदीप पांडे ने बताया कि, 3 साल से इस फ़िल्म के लिए काम रहे है, बहुत कठिनाई आई लेकिन मेहनत करते रहे। उन्होंने बताया कि हमेशा शुरुआत करने के लिए कठिनाई से गुजरना ही पड़ता है, कुछ चीज़ें पता होती है कि क्या होगा पर कॉन्फिडेंट थे, एक कोशिश थी शहर के सिनेमा को आगे बढ़ाने की बस अपनी ताकत को समझकर इसी फिल्म के साथ आये है, लोगों से रिस्पांस मिल रहा है यही जीत है।

लोग कह रहे है शहर को रिप्रेजेंट किया –

संदीप पांडे ने बताया कि, हर शहर का अपना अलग अंदाज व एक फ्लेवर होता है जिससे वह जाना जाता है, जबलपुर का भी अपना एक अंदाज व फ्लेवर है हमारे यहाँ गली- चौराहे, हमारी बुंदेलखंडी बोली। बस इसी को फोकस करके प्रयास किया है अब तो लोग भी कह रहे है जबलपुर को रिप्रेजेंट किया। उन्होंने बताया कि जो आर्टिस्ट जहाँ से निकलता है वह उसे रिप्रेजेंट करता है मैने भी वही कोशिश की है।

निर्देशन की पहली फ़िल्म है –

संदीप ने बताया कि, यह उनके निर्देशन की पहली फ़िल्म है, इससे पहले वे लिखा करते थे साथ ही शॉर्ट फिल्म बनाया करते थे, थियेटर में काम किया करते थे। 2 साल गोवा कला ऐकेडमी में भी ट्रेनिंग ली। बस उसी को आगे बढ़ाया टीम के सभी कलाकारों की मेहनत से चौसर फिरंगी को लाकर। उन्होंने बताया कि दिल्ली, मुंबई व पुणे में जल्द ही फ़िल्म को दिखाने का प्रयास है व आगे के लिए भी 6 7 कहानियां है जो आने वाले समय में देखने मिलेगी।

खुद को पहचाने व तैयारी के साथ आये

जो अभी नयी प्रतिभा सिनेमा के क्षेत्र में आ रही है उनके लिए बस यही कहना चाहता हूं। सिनेमा बहुत गहरा है अपनी कला को जाने व समझदारी के साथ करे जो भी करे। मेहनत करते रहे व तैयारी के साथ आये। उन्होंने कहा कि जब शहर कहने लगे तो आगे का सोचे।

फ़िल्म को थियेटर की तरह ही बनाया है –

हमारे साथ फ़िल्म चौसर फिरंगी में टीटू नाम से मुख्य किरदार निभा रहे बाबाटोला मदार टेकरी निवासी प्रतीक पचौरी भी बातचीत में शामिल हुए उन्होंने बताया कि, इस फ़िल्म को थियेटर की तरह ही बनाया है, उन्होंने बताया कि मैं विवेचना से जुड़ा फिर एमएसडी से भी ट्रैनिंग ली। उन्होंने बताया कि इस फ़िल्म में मेरा किरदार एक वजनदार लड़के का है जो कही भी “सट” लेता है यही का रहने वाला हूं ज्यादातर चीज़ें पता है पर फिर भी रियल मेहनत लगती है मेने 2 महीने रिहर्सल करके यह किरदार निभाया है।

हर किसी ने अपने एरिया को रिप्रेजेंट किया है

प्रतीक पचौरी ने बताया कि, फ़िल्म की खास बात यह है कि फ़िल्म में हर किसी ने अपने-अपने एरिया जो जहाँ रहता है उसे रिप्रेजेंट किया है। सभी की बहुत मेहनत है सारे ही कलाकार थिएटर आर्टिस्ट है। किसी ने कोई कोर्स नही किया सबने थिएटर करते-करते एक प्रयास किया है।

शहर के इन जगहों पर हुई शूटिंग-

डुमना रोड, कछपुरा ब्रिज, विजय नगर, जीरो डिग्री, काछीयाना, नरघईया, सिविक सेंटर, दमोह नाका, मदन महल, मदार टेकरी, अधारताल, मदन महल, सिविल लाइन, रानीताल, लेबर चौक।

फ़िल्म में –

निर्देशक- संदीप पांडे, एक्सक्यूटिव प्रोड्यूसर- तुषार सरकार, रेखा मिश्रा ( लीड एक्टर ) , अंशुल ठाकुर ( क़िरदार मोनू ), प्रतीक ( किरदार टीटू ) , सारिका नायक ( किरदार पीए) , रोहित सिंह ( क़िरदार बल्ला) , टीम में श्रेया, रुद्राक्ष, गौरव , हिरेश, नमन मिश्रा, तरुण ठाकुर, सोहिल, मोहित।

साकेत सिंह