Home धर्म और ज्योतिष गंगा सप्तमी: आज नर्मदा जी से मिलने आएंगी गंगा जी

गंगा सप्तमी: आज नर्मदा जी से मिलने आएंगी गंगा जी

73
0

गंगा सप्तमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह वैशाख मास के शुक्लपक्ष की सप्तमी को हर साल मनाई जाती है। मान्यता है कि वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन मां गंगा की उत्पत्ति हुई। इस कारण इस इसे गंगा जयंती के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है। साल 2019 में यह 11 मई, शनिवार को यानि आज मनाई जा रही है। ऐसी मान्यता है कि गंगा जयंती के अवसर पर गंगा स्नान करने से पुण्यलाभ मिलता है।

पुराणों के अनुसार इसी दिन मां गंगा ने भागीरथी की तपस्या से प्रसन्न होकर धरती पर पधारीं थी। शास्त्रों के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ही गंगा स्वर्ग लोक से शिव शंकर की जटाओं में पहुंची थी। इसलिए इस दिन को गंगा जयंती और गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। वहीं इसके अलावा जिस दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई वह दिन गंगा जयंती (वैशाख शुक्ल सप्तमी) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर अवतरित हुई वह दिन ‘गंगा दशहरा’ (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) के नाम से जाना जाता है इस दिन मां गंगा का पूजन किया जाता है। एक और मान्यता है कि गंगासप्तमी को गंगा जी माँ नर्मदा मैया से मिलने आती हैं। जिससे गंगासप्तमी पर नर्मदा स्नान का महत्व अधिक बढ़ जाता है।

गंगा जयंती के दिन गंगा पूजन और स्नान से रिद्धि-सिद्धि, यश-सम्मान की प्राप्ति होती है और सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन गंगा पूजन से मांगलिक दोष से ग्रसित जातकों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। साथ ही विधि-विधान से गंगा पूजन करना अमोघ फलदायक होता है। पुराणों के अनुसा गंगा विष्णु के अंगूठे से निकली हैं, जिसका पृथ्वी पर अवतरण भगीरथ के प्रयास से कपिल मुनि के शाप द्वारा भस्मीकृत हुए राजा सगर के 60,000 पुत्रों की अस्थियों का उद्धार करने के लिए हुआ था। तब उनके उद्धार के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर माता गंगा को प्रसन्न किया और धरती पर लेकर आए। कहते हैं कि गंगा के स्पर्श से ही सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार संभव हो सका, इसी कारण गंगा का दूसरा नाम भागीरथी पड़ा।