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Mother’s Day: पांव छुए और काम हुए अम्मा एक महूरत थी,,, सिटी यंगस्टर्स बोले जख्म कोई भी हो मरहम सिर्फ “माँ”

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जबलपुर।घुटनों से रेंगते- रेंगते कब पैरों पर खड़ा हुआ, ममता की छाव में न जाने कब बड़ा हुआ, काला टीका दूध मलाई आज भी सब वैसा ही है, मैं ही मैं हूं हर जगह माँ ये तेरा प्यार कैसा है, सीधा-साधा, भोला-भाला जैसा भी माँ मैं आज भी तेरा हूं”… ऐसी ही न जाने कितनी कविताएं जहन में आती है जब माँ का नाम होता है। कहते है साहित्य समाज का दर्पण है,, इस लिहाज से ये कविताएं निश्चित रूप से एक दस्तावेज है जो माँ के ममत्व का अहसास जाहिर करती है। एक कवि ने तो कुछ यूं भी कहा है कि,,,, क्या सीरत क्या सूरत थी, माँ ममता की मूरत थी, पांव छुए और काम हुए, अम्मा एक महूरत थी…!

माँ को पहली शिक्षक का दर्जा प्राप्त है…किसी भी मनुष्य को पहला सँस्कार, ज्ञान उसकी माँ द्वारा ही प्राप्त होता है। कहा जाता है कि भगवान हर जगह नही होते है, इसीलिए उन्होंने माँ को बनाया है। बच्चे कितने भी बड़े क्यों न हो जाये लेकिन वे हमेशा अपनी माँ के लिए छोटे ही रहते है। हर माँ का अपने बच्चे के साथ कुछ खट्टा-मीठा रिश्ता होता है, माँ डांटती है तो प्यार भी उतना ही करती है। माँ अपने बच्चे को एक अच्छी परवरिश देती है एवं पूरे परिवार का ख्याल रखती है, और एक माँ इससे ज्यादा कुछ भी नही चाहती कि उसका बच्चा हमेशा खुश रहे।

मदर्स-डे की शुरुआत

मदर्स डे यानी मातृ दिवस की सबसे पहले शुरुआत अमेरिका में एक्टिविस्ट एना जार्विस ने की थी। वे अपनी मां इसे प्रेरित थी और मा के सम्मान के लिए उन्होंने यह दिवस पहली बार 1908 में मनाया था, भारत मे हर साल मातृ दिवस मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।

सँस्कारधानी के बच्चों ने कर रखी है खास तैयारी

वैसे तो माँ के लिए कोई एक दिन नही होता है माँ के लिए हर दिन है लेकिन सँस्कारधानी जबलपुर में मदर्स डे आज यानी रविवार 12 मई को मनाया जाएगा। मदर्स डे सेलिब्रेट करने के लिए शहर में भी बच्चों ने अपनी माँ के लिए खास तैयारियां कर रखी है। मदर्स डे ( मातृ दिवस ) पर जब Fourthpiller.com ने सिटी यंगस्टर्स से खास बातचीत की तो उन्होंने बताया कि वे अपनी माँ के साथ इस खास दिन को बेहतरीन बनना चाहते है, कोई माँ के साथ पूरा दिन बिताने वाला है तो कोई माँ के लिए स्पेशल तोहफा तैयार कर रखा है। अपनी-अपनी माँ को खुश करने और उनका दिन यादगार बनाने के लिये बच्चो ने सारी तैयारियां कर रखी है। यंगस्टर्स ने बताया कि जख्म कैसा भी हो, मरहम सिर्फ एक ही होता है वो है माँ,,, तो चलिए आपको बताते है क्या कहना है सिटी यंगस्टर्स का ,,,, –

हमारा एक उद्देश्य और एक ही सपना है

सारेगामापा विनर शहर की लाडो इशिता विश्वकर्मा ने बताया कि उनका अपनी माँ तेजल के साथ रिश्ता बहुत मजबूत है, हम दोनों दोस्त की तरह हैं, मैं उन्हें बहुत प्यार करती हूं। मा मेरी लाइफ लाइन है। हम हर एक समस्या को आपस मे साझा करते हैं। इशिता कहती है कि हमारा एक उद्देश्य और एक ही सपना हैं। मैं आज जो भी हू सिर्फ अपनी माँ की वजह से हूं। उन्होंने बताया कि वे बॉलीवुड में एक सफल प्लेबैक सिंगर बनना चाहती है जो कि उनकी माँ तेजल विश्वकर्मा का सपना है।

जो भी हूं उसमे मेरी माँ की तारीफ है उन्होंने कर्मठ बनाया

बाल भवन कलाकार बालश्री अवार्ड से सम्मानित श्रेया खंडेलवाल ने बताया कि वे मैं अपनी “मम्मी” को “धन्यवाद” नहीं बोलेंगी, क्योंकि उनके “महत्त्व” के सामने धन्यवाद बहुत छोटा शब्द है। वे “ज्योतिषी” हैं, क्योंकि वे मेरे कष्ट और परेशानियां बिना बताए ही समझ लेती हैं। चोट मुझे लगती है, पर आँसू उनकी आँखों में आते हैं श्रेया कहती है मैं जो भी हूं उसमे मेरी माँ की तारीफ है उन्होंने कर्मठ बनाया। मैं “मातृदिवस”पर मम्मी को घर के काम से अवकाश देना चाहूँगी। उनसे निवेदन करूँगी कि वे आज अपने मनपसंद शौक पूरे करें। मैं 1 दिन के लिए घर की ज़िम्मेदारी स्वयं वहन करना चाहूँगी।

माँ बच्चों की निर्माणकर्ता होती है

थियेटर आर्टिस्ट आयुष राय ने बताया कि माँ के लिए कुछ लिखना आसमान में टिमटिमाते तारों की गिनती करने जैसा है। माँ शब्द जितना छोटा है उतना ही बड़ा संसार ख़ुद में समेटे हुए होता है, माँ वाक़ई में बच्चों की निर्माणकर्ता होती है जो अपनी पूरी मेहनत लगा देती है अपने बच्चें को एक बेहतर इंसान बनाने और उसे एक बेहतर भविष्य देने के लिए। मेरा और माँ का रिश्ता कमाल का है मेरी माँ मुझे अब भी डाँटती है, बाहर जाने से पहले मुझे समझाइश देती है, अच्छे से रहना, अच्छा खाना, जल्दी और अच्छे से घर वापस आजाना, क्यों.।क्योंकि तेरे बिना घर सूना लगता है.. माँ तो यह कह देती है पर उन्हें कभी नहीं कह पाता की माँ घर तो असल में आपके बिना सूना लगता है।

मेरी माँ का मेरी ज़िंदगी में अहम रोल है

बाल भवन कलाकार पलक गुप्ता ने बताया कि, उनका और माँ का एक प्यार भरा रिश्ता है माँ मुझे हमेशा सपोर्ट करती है मेरी ज़िंदगी में माँ का रोल अहम है में जो भी करती हूं माँ हमेशा साथ देती है। आज मदर्स डे मौके पर माँ के साथ बाहर डिनर का प्लान है साथ ही माँ के लिए खास तोहफ़ा भी तैयार है।

मेरी माँ मेरी सबसे अच्छी दोस्त है

ओशिन बिजलवान ने बताया कि उनका और माँ का रिश्ता बड़ा ही मजेदार है हम दोनों दोस्त की तरह है मैं मम्मी से अपने सारे सिक्रेट्स शेयर करती हूं, जब कही जाना होता है तो माँ के साथ चली जाती हूं। मेरी माँ मेरी सबसे अच्छी दोस्त है। आज का पूरा दिन माँ के लिए है, औऱ उनके लिए खास तैयारी भी कर रखी है।

माँ को देखता हूँ, तो एक सशक्त महिला को पाता हूँ

प्रकाम सिंह राजपूत ने बताया कि जब भी अपनी माँ को देखता हूँ, मैं एक सशक्त महिला को खड़ा पाता हूँ। वो एक कामकाजी महिला नहीं हैं, वे एक गृहणी है जितनी गृहणी उससे दोगुनी गुणी। चाहे वह घर का कोई काम हो या बाहर का। जिस स्फूर्ति के साथ वे इन कामों को करती है। मेरे लिए वे किसी ‘सुपर वुमन’ से कम नहीं। हम अक्सर Woman Empowerment की बात करते है आज उन्हें देखकर लगता है- “Women Are Already Empowered Now

दिल की धड़कन है मेरी माँ

दिग्या सिन्हा कहती है कि माँ और में एक अच्छे दोस्त है, मेरी माँ मेरे लिए दिल की धड़कन है जैसे जीने के लिए धड़कन ज़रुरी है वैसे ही मेरे लिए माँ है। उनसे बहुत प्यार करती हूं। मदर्स डे खास मौके पर आज सारा दिन उनके साथ एन्जॉय करूँगी। साथ ही उनके लिए खास तोहफ़ा भी तैयार है।

माँ को शब्दों में बयां नही किया जा सकता

हरेंद्र कोरी ने बताया कि माँ के लिए सिर्फ एक दिन नही होता हर दिन मातृ दिवस होता है। माँ को शब्दों में बयां नही किया सकता है। मेरा और माँ रिश्ता बड़ा ही नोक-झोंक वाला है मैं अपनी माँ से हर बात शेयर करता हू। मेरी माँ मेरे लिए भगवान है उनसे ही मेरी पहचान है।

माँ से ही मेरी ख़ुशी है

पूजा राय ने बताया उनका उनकी माँ के साथ रिश्ता दोस्त का है। मेरी ख़ुशी सिर्फ माँ है। मेरे लिए माँ भगवान का सबसे अच्छा तोहफ़ा है। शुक्रगुजार हूं कि मुझे ऐसी माँ मिली है जिन्होने मुझे हर तरीके से सपोर्ट किया है और करती है। आज का दिन सिर्फ माँ के नाम होगा, माँ के लिए खास सरप्राइज भी तैयार है।

! रिपोर्ट : साकेत सिंह ठाकुर !