Home साहित्य कविताएं अभी राह पर चलना औऱ बाकी है : रामप्रकाश राजपूत

अभी राह पर चलना औऱ बाकी है : रामप्रकाश राजपूत

170
0

राही…..

मुझे मालूम है क़ीमत तेरे हर इक हिसाब की
थोड़ा सब्र रख
मुझे भी किसी का उधार रखने की
आदत नही है …

अभी राह पर चलना औऱ बाकी है
किरदारों को समझना अभी बाकी है
अभी अहसास नहीं है जमाने को कि क्या हूँ मैं
मुझे कुछ और करतब करके दिखाना अभी बाकी है …

माना उन्हें कामयाबी जल्दी मिल गयी
मगर मैं क्यों जाऊँ उस रास्ते पर जिस रास्ते पर चलकर उन्हें मंजिलें मिली
उनकी मंजिलें कुछ और थी मेरी मंजिल कुछ और है
उनके रास्ते कोई और थे मेरे रास्ते कोई और हैं…
.

! लेखक – रामप्रकाश राजपूत !