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रादुविवि: साहित्य समाज को प्रतिबिम्बित करता है: कुलपति प्रो.मिश्र, दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

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जबलपुर। साहित्य समाज को प्रतिबिम्बित करता है। समसामयिक चुनौतियाँ हमेशा रहती है और साहित्य के माध्यम से ही साहित्यकार उसे समाज के समक्ष प्रस्तुत करता है उक्त विचार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में मंगलवार को हिंदी एवं भाषाविज्ञान विभाग व केंद्रीय हिंदी निदेशालय, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “वर्तमान में साहित्य की चुनौतियां’ विषय पर द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के शुभारंभ अवसर प प. कुंजीलाल दुबे प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. मिश्र ने व्यक्त किये।

इससे पहले संगोष्टी का शुभारंभ विवि कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र की अध्यक्षता, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विवि, वर्धा के कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल के मुख्य आतिथ्य, व वरिष्ठ साहित्यकार नीरजा माधव, वाराणसी, केन्द्रीय हिंदी निदेशालय के डॉ. दीपक पाण्डेय की विशेष उपस्थिति एवं विवि कुलसचिव प्रो. कमलेश मिश्रा के आतिथ्य में किया गया

इस अवसर पर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. शुक्ल ने मुंशी प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य के माध्यम समाज की चुनौतियों को रेखांकित किया। वरिष्ठ साहित्यकार नीरजा माधव ने थर्ड जेन्डर की चुनौतियों को अपने साहित्य में विस्तृत रूप से विश्लेषित करते हुए एक अलग ही परिभाषा दी। विवि कुलसचिव प्रो. कमलेश मिश्रा ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। उन्होंने किसी भी कार्य में बहुलता के स्थान पर गुणवत्ता पर जोर दिया। इस दौरान कार्यक्रम में आज संगोष्ठी के प्रथम दिन दो तकनीकी सत्र हुए जिसमें 25 से अधिक शोध-पत्रों का वाचन हुआ।

इस अवसर पर पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सुषमा दुबे का सम्मान किया गया। संगोष्ठी संयोजक डॉ आशरानी ने कार्यक्रम का संचालन व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र पाठक ने आभार व्यक्त किया।