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रादुविवि: साहित्य में समाज कल्याण समाहित हो : कुलपति प्रो. मिश्र, दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन

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जबलपुर। साहित्य में अगर ऐसी चीज समाहित होगी जो समाज कल्याण के लिए हो तो वह साहित्य कालजयी हो जाएगी। उक्त उद्बोधन रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो कपिलदेव मिश्र ने बुधवार को विवि में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर अपने अध्यक्षीय आसंदी में कहा। इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि सुभद्रा कुमारी चौहान के पौत्र पश्चिम मध्यरेलवे के प्रधान वित्त सलाहकार कार्तिक चौहान ने कहा कि संगोष्ठी जहां शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण होती है वहीं समाज में व्याप्त हर तरह की समस्याएं या चुनौतियां को भी सामने लाती है जिससे उन चुनौतियों को दूर करने का हम सब को एक मौका मिलता है और हमारा मार्ग भी प्रशस्त होता है क्योंकि जहॉं चुनौतियां होती है वहीं पर समाधान भी होता है।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ग्वालियर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने साहित्य की चुनौतियों कहा कि साहित्य को समृद्ध करने की आवश्यकता है साहित्य की गंभीरता अगर पाठकों को मिले तो उसमें कोई चिंता करने की बात नहीं है साहित्य ऐसा होना चाहिए कि जो समाज को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि साहित्य लिखने से अगर धन मिले तो अच्छा है लेकिन धन के लिए जब साहित्य लिखा जाता है तो वह ठीक नहीं होता है।

इस अवसर पर समापन पर संगोष्ठी संयोजक डॉ आशा रानी ने संगोष्ठी की प्रतिवेदन पढ़ा और बताया कि शोध छात्रों के 50 से अधिक शोध पत्रों का वाचन हुआ और जो पहले से शोधपत्र एकत्र हुए थे उसका संकलन करके एक शोध पत्रिका जो आईएसबीएन नंबर से पुस्तक के आकार में प्रकाशित हुई उसका विमोचन हुआ और पूरे देश से हमारे जो विद्वान और अतिथि पधारे थे, उन्होंने साहित्य की चुनौतियों पर विभिन्न तरह के विचार रखे। कार्यक्रम में दीपक कुमार ललखेर, उमाकांत नाग, टीकाराम, संजीव कुमार पांडेय, विजय बहादुर यादव, त्रिभुवन गिरी, मोनिका पौराणिक, आरती, पंकज सोनी, आशुतोष अंजलि जैन दीप्ती आदि का सहयोग रहा।