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हमे जिससे मोहब्ब्त थी वह इस बात से बेखबर रह गई : रामप्रकाश राजपूत

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खबर बेखबर

मुझे उससे मोहब्बत है ना जाने कितनों को इस बात की खबर हो गई थी, बस जिससे मोहब्बत थी वो ही इस बात से बेखबर रह गई थी,,, इक रोज मैं उसके गेट के सामने से गुजरा जिस गेट के सामने से कभी वो अंदर आई थी, गुलाबी रंग का सूट पहना था उसने और माथे में छोटी सी बिंदी भी लगाई थी…

देखकर उसे मेरा दिल और दिमाग ख्यालों में खोने लगा था, यूँ तो कई दफा सुने थे परियों के किस्से मैंने मगर अब मुझे भी उन किस्सों पर यकीन होने लगा था! जो रंग था उसका वह रंग मुझ पर भी चढ़ने लगा था, बीतते वक्त के साथ मै उसके और करीब आने की कोशिश करने लगा था…

जब मैं उससे कॉपी लेने जाता तो सब कहते हैं कि हम से कॉपी लेने में कोई दिक्कत है क्या, जब मैं उसके पास वाली डेस्क पर बैठने की कोशिश करता तो बाकी कहते हैं आखिर बात क्या है, जब मैं उसकी बातें करता तो सब कहते तुझे कोई और काम नहीं है क्या, मगर कुछ समय बाद वो वक्त आ ही गया जब उसकी सहेली ने मुझे उस से मिलाया था, उसी रोज पहली बार उसने मुझसे हाथ मिलाया था….

उसके हाथ मिलाने के बाद मैं तो खुशी से फूला नहीं समा रहा था और मेरा यह व्यवहार उसकी सहेली को भी नजर आ रहा था, मैं अपने हाथों को देखता रहा और खोया रहा उसके ख्याल में ,पता ही नहीं चला कब शाम से रात रात से सुबह और सुबह से दोपहर हो गई थी ,मुझे उससे मोहब्बत है ना जाने कितनों को इस बात की खबर हो गई थी , बस जिससे मोहब्बत थी वी ही इस बात से बेखबर रह गई थी....

मेरे ख्यालों में वो मेरे जितने पास होने लगी थी, मेरे सारे दोस्तों में हमारी चर्चा उतनी ही खास होने लगी थी! सोचता हूं जो मेरी निगाहों के समुंदर में उसकी नाव गोते लगाती थी उसे नजर आया था क्या, उसकी सहेलियों ने कभी उसे मेरे दिल का हाल सुनाया था क्या!

मेरे दोस्त कहते थे तुझे उससे मोहब्बत हो गई है, और मैं अक्सर इसका जवाब ना में ही देता था, मैं जो उससे कह नहीं पाया वह बातें मेरी आंखें कह गई थी! मुझे उससे मोहब्बत है ना जाने कितनों को इस बात की खबर हो गई थी, बस से मोहब्बत ही वह इस बात से बेखबर रह गई थी…

उस दिन मुझे समझ में आया कि दोस्त हमारे दिल के जज्बात समझ लेते हैं आंखों की बात समझ लेते हैं और हमें उससे प्यार है या नहीं ये हम से पहले हमारे यार समझ लेते हैं! जो पसंद हो उसे वो मुझे भी अच्छा लगने लगा था, उसे पाने की चाहत में मैं और बेहतर बनने की कोशिश करने लगा था…

मुझे उससे मोहब्बत है ना जाने कितना कोई बात ही खबर हो गई थी बस जिससे मोहब्बत थी वह इस बात से बेखबर रह गई थी

! कवि- रामप्रकाश राजपूत !