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विश्व पर्यावरण दिवस 2019: ‘बीट एयर पॉल्युशन’ की थीम पर इस बार की अपील “हवा आने दो”

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दुनियाभर में प्रत्येक वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को मनाया जाता है। इस दिन की खास बात यह है कि, हर साल पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और विकास का संकल्प लिया जाता है। मगर वही हम दूसरी तरफ देखे तो इनपर उतना अमल नहीं किया जाता जितना कि किया जाना चाहिए, वर्तमान परिदृश्य में जैसे-जैसे शहर विकसित होते जा रहर हैं, वैसे हरियाली भी कम होती जा रही है साल दर साल प्रदूषण में बढ़ोतरी ही हो रही है। इसी की एक वजह यह भी है कि मौत के आंकड़े भी बढ़ जाते हैं। प्रदूषण लगातार हमारी सांसें कम कर रहा है। नए पैदा होने वाले कई बच्चों पर इसका असर भी दिख रहा है।

आज विश्व पर्यावरण दिवस है, इस खास मौके पर हम सभी को ऐसा प्रण लेना चाहिए जो आने वाली पीढ़ियों को साफ सुथरी हवा देने में मददगार हो सके। धरती पर लगातार बेकाबू होते जा रहे प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग जैसे कारणों के चलते वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे की शुरूआत की गई थी। पर्यावरण दिवस प्रत्येक वर्ष एक नई थीम पर मनाया जाता है, इस साल की थीम ‘बीट एयर पॉल्युशन’ है। जो कि वायु प्रदूषण मानव जीवन के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभरा है। “बीट एयर पोल्यूशन” की थीम पर इस बार की अपील है ‘हवा आने दो’ दरअसल इस खास मौके पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मुंबई के भामला फाउंडेशन की सहायता से ‘हवा आने दो’ गीत तैयार किया है। जो इस साल की थीम पर आधारित है। मशहूर हस्तियों और प्रभावशाली व्यक्तियों से युक्त इस गीत का उद्देश्य वायु प्रदूषण से जुड़े संदेश का प्रचार-प्रसार करना है।

पर्यावरण दिवस का इतिहास

भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने साल 1974 की गोष्ठी में ‘पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव’ विषय पर व्याख्यान दिया था। पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में यह भारत का पहला कदम था। तभी से हम हर साल 5 जून का यह दिन पर्यावरण को समर्पित करते आ रहे हैं। वही पर्यावरण से संबंधित अधिनियम 19 नवंबर 1986 में लागू हुआ था। इसमें जल, भूमि और वायु तीनों से संबंधित कारक जैसे मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं।

इसीलिए मनाया जाता है –

पर्यावरण की समस्या पर पहला सम्मेलन साल 1972 में स्टॉकहोम की राजधानी स्वीडन में आयोजित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में 119 देशों ने भाग लिया था। इसी सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की स्थापना की गई थी। और हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाने का फैसला लिया गया। ताकि नागरिकों को प्रदूषण की समस्या से अवगत किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था।