हमे जिससे मोहब्ब्त थी वह इस बात से बेखबर रह गई : रामप्रकाश राजपूत

खबर बेखबर मुझे उससे मोहब्बत है ना जाने कितनों को इस बात की खबर हो गई...

अभी राह पर चलना औऱ बाकी है : रामप्रकाश राजपूत

राही..... मुझे मालूम है क़ीमत तेरे हर इक हिसाब की थोड़ा सब्र रख मुझे भी...

जब साथ मिला तेरा तो फागुन,,,, : रामप्रकाश राजपूत

जब साथ मिला तेरा तो फागुन फागुन सा लगने लगा ....... अरमान मोहब्बत का आँखों में मेरी...

आरजू की राह से आस्तित्व के पथ पर आई : रुचि तिवारी

तमन्नाओ ने मुझे किस राह पर लाया, मैं कभी तकाजा ही नही लगा पाया, पूंछा जो खुद से मैने खुद की...

अब तुमको है करना मतदान भला: रुचि तिवारी

छत पर बैठी सोच रही थी नीचे से एक गूँज उठी थी एक रिक्शा गाना बजाए चला हर राह को अपना बनाए। ध्यान उसने कुछ...

गिरे हो तो मुमकिन है: आयुष राय

गिरे हो तो मुमकिन है,चलना सीख जाओगे।। ठोकरें नही खाओगे तो, कैसे टिक पाओगे। आग फैली है शहर की फ़िजा में राजनीति की, उस पर जुल्म साहब...

है मोहब्बत, तो इकरार भी करो: आयुष राय

है मोहब्बत, तो इकरार भी करो, नज़र झुकाकर, नज़र उठाकर यूं न बेकरार करो.. वैसे ही ज़िन्दगी घटती चली जा रही है, अब यूं न लाज...

बहुत याद आता है गुजरा जमाना: पं.दिलीप गर्ग

*याराना* वो यारों की महफिल वो दिलकश तराना बहुत याद आता है गुजरा जमाना वो जेबें थी खाली वो सुबहें गुलाली वो घर से छुपकर अपनी यारी निभाना बहुत...

मन की पीड़ा : शुभांशु जैन

आधा जीवन जब बीत गया बनवासी सा गाते-रोते तब पता चला इस दुनियां में सोने के हिरन नहीं होते। सूनी घाटी में अपनी ही प्रतिध्वनियों ने यों छला हमे हम...

कुछ दूर तुम भी साथ-साथ आते

जो लहरों से आगे गर नजरें देख पाती, तो तुम जान लेते में क्या सोचता हूं वो आवाज़ तुमको जो भेद जाती, तो तुम जान लेते में...

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